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Showing posts from May, 2017

अधूरा

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तेरा घर भी जनता है , वो पत्थर भी जनता है ! की में तेरा आशिक हु , ये अम्बर भी जनता है । में पूरा दिखता हु पर अधूरा हु कही तुझ बिन ! ये तू भी समजती है , ये शहर भी जनता है ।                   ...

मेरा दिल

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न कोई गीत सुहानी है , न कोई ग़ज़ल ही भाता है । जब भी तुम रूठि हो , कलम भी रुठ जाता है । ये क्या सिल्ला मिला मुझे मोहब्बत में मेरे मौला ! में जिसको बहुत हसाया हु ,वो मुझको बहुत रूलाता है।                                                - दिव्यांश पाठक                  

दिल की बात

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 हा थोड़ी ख़ुशी मिली हमको ,हा  थोड़े गम मिले हमको !  ख़ुशी हो या गम  दोनों  में आंख नम मिले हमको। ज़माने  को भी मिल गए हम ,तुमको भी मिल गए हम! पर न तुम मिली हमको , न ही हम मिले हमको।                                                - दिव्यांश पाठक