मेरा दिल
न कोई गीत सुहानी है , न कोई ग़ज़ल ही भाता है ।
जब भी तुम रूठि हो , कलम भी रुठ जाता है ।
ये क्या सिल्ला मिला मुझे मोहब्बत में मेरे मौला !
में जिसको बहुत हसाया हु ,वो मुझको बहुत रूलाता है।
- दिव्यांश पाठक
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