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मोहहब्बत

इश्क़ करता हु लेकिन चोट खाया नही कुछ भी मय बदनाम है पर नशा छाया नही कुछ भी भले कितने गुलाब हो जमाने के बागों में मगर भवरे को काँटो के सिवा भाया नही कुछ भी